अंतर्राष्ट्रीय

कौन था वाइट डेथ? जिसने द्वितीय विश्व युद्ध में अकेले मार गिराए 500 रूसी सैनिक…

बात तब की है, जब द्वितीय विश्व युद्ध की घोषणा हो चुकी थी।

सोवियत रूस की खतरनाक रेड आर्मी फिनलैंड की ओर बढ़ रही थी।

जनवरी का महीना था और तापमान शून्य से काफी नीचे। हाड़ कंपा देने वाली ठंड में सोवियत रूस की आर्मी चलती रहती है, तभी एक सिपाही धड़ाम से गिरता है।

कुछ ही पलों में रूसी सैनिकों के जमीन पर गिरने का सिलसिला जारी रहता है। कोई समझ नहीं पा रहा था कि आखिर ये सब हो क्या रहा है? तभी उनका एक कमांडर पेड़ के पीछे छिपकर चिल्लाता है- छुप जाओ, ये वाइट डेथ है।

फिनलैंड का वो जाबांज सिपाही जिसे रूसी सेना ने ये नाम दिया था। इससे रूसी सेना में इस सिपाही के खौफ का अंदाजा लगाया जा सकता है।

कहा जाता है कि इसने अपने सफेद कपड़ों से लेकर बंदूक को भी वाइट पेंट करवा दिया था। सुबह सूरज उगने से पहले अपने बंकर में तैनात हो जाता था और शाम तक कत्लेआम मचाता रहता था।

जानकार ये भी बताते हैं कि इसी शख्स की वजह से सोवियत रूस जैसी अभेद्य ताकत फिनलैंड जैसे मामूली देश पर कब्जा नहीं कर पाई। 

फिनलैंड के जाबांज सिपाही सिमो हायहा को इतिहास का सबसे खतरनाक स्नाइपर कहा जाता है। 20 वीं सदी में इसके नाम से दुनिया खौफ खाती थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसने अपने देश फिनलैंड की तरफ बढ़ रही सोवियत आर्मी के करीब आधे जवानों को अकेले ही मार गिराया। महज 96 दिनों में सिमो हायहा ने दुश्मन के 500 से ज्यादा सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था।

कौन थे वाइट डेथ
सिमो हायहा या वाइट डेथ का जन्म 17 दिसंबर, 1905 को फिनलैंड के दक्षिण करेलिया के राऊतजेरवी प्रांत में हुआ था।

इसने द्वितीय विश्व युद्ध में फिनलैंड के लिए रूसी सैनिकों का बड़ी संख्या में कत्लेआम किया था। 1925 में सिमो को एक वर्ष की सैन्य सेवा के लिए नियुक्त किया गया था।

इन्होंने शुरुआत में ही अपनी सैन्य शक्ति का ऐसा प्रदर्शन किया इन्हें लगातार पदोन्नति मिलती गई। बाद में, सिमो फिनिश सिविल गार्ड में शामिल हो गए और उन्हें शूटिंग के प्रति अपनी प्रतिभा और जुनून का पता चला।

ऐसा कहा जाता है कि इन्होंने अपना सारा खाली समय निशानेबाजी के अभ्यास में लगाया। आखिरकार वह 500 फीट (152 मीटर) से प्रति मिनट 16 लक्ष्यों को मार सकते थे। धीरे-धीरे द्वितीय विश्व युद्ध में यह सबसे चर्चित स्नाइपर कहलाए।

जब सिमो के सामने थी 4000 रूसी सेना
1939 में फ़िनलैंड में सर्दियों के वक्त सोवियत रूस की टेढ़ी नजर जम चुकी थी। सोवियत रूस को लगा कि उसके पास फिनलैंड पर कब्जा करने का सुनहरा मौका है।

रूसी सेना शायद यह मान चुकी थी कि फ़िनलैंड जैसे छोटे देश पर कब्ज़ा करना आसान होगा। लेकिन, वो तब तक वाइट डेथ से अपरिचित थे।

जब सोवियत रूस के 4000 जवान फिनलैंड की तरफ बढ़ रहे थे तो उनके सामने थे- सिमो हायहा और उनके 31 साथी जवान। 

कैसे मिला वाइट डेथ नाम
फिनलैंड और सोवियत रूस के बीच यह जंग करीब 100 दिन चली। तब तक सिमो हायहा 500 रूसियों को नरक पहुंचा चुके थे।

हालांकि कुछ बताते हैं कि यह आंकड़ा 800 से भी ज्यादा था। ऐसा बताया जाता है कि सिमो उर्फ वाइट डेथ एक दिन में दुश्मन के करीब 40 सैनिकों को ढेर कर देते थे।

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