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तीन दिन तक धान बेचने पर पाबंदी, टोकन ही नहीं कटे।

केवल अन्तिम दो दिनों में ही होगी धान खरीदी, पिछले साल से भी कम होगा धान उपार्जन।

रायगढ़, 28 जनवरी 2025 // धान खरीदी प्रक्रिया में अचानक से ब्रेक लग गया है। सोमवार से तीन दिनों तक टोकन काटने पर पाबंदी लगा दी गई है। ऐन खरीदी के बीच ऐसा करने से कन्फ्यूजन हो गया है। 27-29 जनवरी तक तीन दिनों के लिए खरीदी बंद कर दी गई है। केवल अंतिम दिनों के लिए ही टोकन मिल रहे हैं। शासन ने इस बार रिकॉर्डतोड़ धान खरीदी की है क्योंकि प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदा गया है। पिछली बार 20 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से खरीदी की गई थी। इस लिहाज से कम खरीदी हुई है। सरकार ने इस बार बोगस खरीदी और रिसायक्लिंग को रोकने के लिए कड़ाई करने के निर्देश दिए थे।

रायगढ़ में इसका पालन हुआ जिसकी वजह से धान खरीदी पर नियंत्रण लग पाया। सोमवार से धान खरीदी पूरे प्रदेश में रोक दी गई है। अचानक से तीन दिन तक टोकन जारी करने पर प्रतिबंध लगा देने से समितियों में किसान हंगामा करने लगे हैं। पोर्टल से भी सारे विकल्प हटा दिए गए हैं, जिसके तीन टोकन नहीं हो सके हैं, उसको अंतिम दो दिनों में धान बेचने को कहा गया है। सारे टोकन 30-31 जनवरी के लिए काटे जा रहे हैं। सोमवार से धान खरीदी बंद होने के पीछे वजह कुछ और है। दरअसल इस बार धान खरीदी उम्मीद से अधिक हो चुकी है। सरकार की मंशा इससे भी कम में रोकने की थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

रायगढ़ जिले में सख्ती का पूरा असर दिख रहा है। वर्ष 23-24 में जिले में कुल 53.91 लाख क्विं. धान की खरीदी की गई थी। इस बार मामला पलट गया है। अब तक 85237 पंजीकृत किसानों में से 70926 किसानों ने 48.85 लाख क्विं. धान बेच लिया है। 83 प्रश किसानों ने धान विक्रय किया है। जबकि पंजीकृत रकबा 1,27,021 हे. में से 94141 हे. पर धान बेचा जा चुका है, जो 74 प्रश होता है। अब तीन दिनों तक धान खरीदी बंद कर दी गई। इस बीच अंतिम दो दिनों के टोकन काटे जा रहे हैं। प्रत्येक टोकन का भौतिक सत्यापन होगा। जिसके पास धान मिलेगा, वही धान बेच पाएगा। अन्यथा उसका रकबा सरेंडर कराया जाएगा। अंतिम दो दिनों में करीब तीन लाख क्विं. धान खरीदे जाने का अनुमान है। ऐसे में कुल खरीदी करीब 51.50 लाख क्विं. तक पहुंचेगा जो पिछले साल से भी कम होगा।

सात हजार हेक्टेयर रकबा समर्पित।

धान खरीदी के इतिहास में ऐसी सख्ती पहली बार हुई। बिचौलियों के चैनल को तोडऩे के लिए प्रयास किए गए हैं। कृषि विभाग के एक अधिकारी पर भी धान रिसायकल कराने के आरोप लगे हैं। इसके बावजूद जिनके पास धान नहीं बचा, उनका रकबा समर्पित कराया जा रहा है। इस बार करीब 40 हजार किसानों के सात हजार हे. रकबा समर्पित हो चुका है। सोचिए कि यह वो रकबा है जिस पर हर साल कोचिए अपना धान बेच लेते थे।

औसत उत्पादन ही बना आधार।

इस बार सरकार ने क्षेत्रवार औसत उत्पादन निकालने का आदेश दिया था। फसल कटाई प्रयोग के जरिए औसत निकाला जाता है। किसी भी क्षेत्र का औसत उत्पादन 21 क्विं. प्रति एकड़ नहीं है। तो फिर सरकार इस औसत से खरीदी क्यों करे? अंतिम दो दिनों में ही सारे बचे हुए किसानों को धान बेचना होगा। इस बीच तीसरे चरण का भौतिक सत्यापन भी हो रहा है जिसमें शॉर्टेज सामने आ रहा है।

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