

तमनार समिति में पंजीयन में ही है गड़बड़ी, अपेक्स बैंक सुपरवाईजर ने छिपाया सच।
रायगढ़, 18 जनवरी। तमनार समिति में बोगस खरीदी का भांडा फूटा है। 80 लाख का धान आया नहीं और सॉफ्टवेयर में चढ़ा दिया गया। इस मामले में प्रबंधक निलाद्री पटनायक समेत ऑपरेटर, फड़ प्रभारी और बारदाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन जांच अधूरी ही है। यह पता लगाना बाकी है कि किस किसान के पंजीकृत रकबे पर बोगस खरीदी की गई।
धान खरीदी में इतनी चुस्त व्यवस्था होने के बावजूद तमनार प्रबंधक व अन्य ने प्रशासन की आंखों में धूल झोंक दी। प्रबंधक निलाद्री पटनायक ने बिचौलियों के साथ मिलकर किसानों के पंजीकृत रकबे पर बोगस खरीदी कर दी। जांच में 6529 बोरी (2611 क्विंटल) धान कम पाया गया। 4054 नए बारदाने अधिक मिले तथा 5980 पुराने बारदाने कम पाए गए। अक्सर धान खरीदी में गड़बड़ी के मामलों में कार्रवाई लचर तरह से होती है। घोटाले को होने दिया जाता है, फिर निलंबन होता है, फिर एफआईआर दर्ज करवाई जाती है। इसके बाद गिरफ्तारी हुई तो ठीक, नहीं हुई तो भी दोषी अग्रिम जमानत ले आता है।

इस बीच धान खरीदी खत्म होकर उठाव भी पूरा हो जाता है। मामले को रफा-दफा करने के लिए प्रबंधक को कहकर धान की भरपाई की जाती है। मामला खत्म हो जाता है। सालोंसाल से यही चल रहा है। तमनार में भी प्रकरण अब इसी रास्ते पर चल रहा है। प्रबंधक को निलंबित कर इस मामले से राहत दे दी गई। जांच में केवल धान और बारदाने की कमी को ही दर्शाया गया है। सरकार ने 80 लाख रुपए ऐसे धान के एवज में दे दिए हैं, जो खरीदा ही नहीं गया। धान है ही नहीं और किसानों के एकाउंट में रुपए पहुंच गए।
कैसे पता चलेगा, किसके खाते में बेचा धान
तमनार समेत ऐसे सभी दागी खरीदी केंद्रों में वास्तविक किसानों को परेशान किए बिना, फर्जी खरीदी वाले रकबों की पहचान करना जरूरी है। तमनार में उन किसानों की पहचान जरूरी है जिनके पंजीकृत रकबे पर बोगस खरीदी हुई। कृषि विभाग और राजस्व विभाग की गिरदावरी में भी गड़बड़ी हुई है। जहां धान की खेती हुई ही नहीं, उसका भी पंजीयन किया गया है। बोगस खरीदी वाले किसानों की पहचान कर उनके खातों को होल्ड करने की कार्रवाई पहले की जानी चाहिए। अपेक्स बैंक की भी लापरवाही रही।
तमनार समिति में सबसे ज्यादा निरस्त हुए किसान
वर्ष 2023 में तमनार समिति में 1363 किसानों ने करीब 2004 हे. रकबे का पंजीयन करवाया था। इसमें से 2024 में 1282 किसानों का 1856 हे. ही कैरी फारवर्ड हुआ। जिले में सबसे ज्यादा तमनार में 75 किसानों को कैरी फारवर्ड की सूची से निरस्त किया गया था। इसके बावजूद तमनार समिति में 1396 किसान और करीब 2000 हे. रकबा हो गया। यह गड़बड़झाला ही घपले की जड़ है। कृषि विभाग और अपेक्स बैंक ने ऐसे किसानों को मान्यता दे दी जिन्होंने खेती ही नहीं की।




