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भिलाई नेहरू नगर के रेस्टोरेंट लिस्टोमानिया में दूसरा होलोग्राम लगाकर बेची जा रही थी शराब, फिर भी नहीं हो रही थी कार्रवाई…

भिलाई नेहरू नगर के सूर्या मॉल में संचालित शहर के सबसे बड़े बार और रेस्टोरेंट लिस्टोमानिया में शराब की कोचियागिरी हो रही थी।

जिस बार में पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारी कार्रवाई से डरते थे, वहीं भारी मात्रा में शराब की बोतल में लगाने वाले फर्जी होलोग्राम मिले हैं।

इतना ही नहीं संचालक के पास न तो फूड लाइसेंस था और न उसने अपने यहां रखे बाउंसरों और कर्मचारियों का कोई पुलिस वेरिफिकेशन कराया था।

इसका खुलासा तब हुआ जब दुर्ग एसडीएम और आईएएस लक्ष्मण तिवारी ने लिस्टोमानिया बार एवं क्लब में देर रात छापेमारी की।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने क्लब में भारी मात्रा में होलोग्राम पाया। पूछने पर पता चला की वे फर्जी होलोग्राम लगाकर बार में शराब बेचते थे। यहां तक की बाहर के लोगों को शराब की बोतल तक बेचते थे। इस तरह मॉल के अंदर एक बड़ा क्लब चलाकर यहां शराब की कोचियागिरी की जाती थी।

ऐसा करके उनके द्वारा शासन को बड़ी मात्रा में राजस्व की क्षति पहुंचाई गई। इतना ही नहीं दस्तावेजों की जांच करने पर क्लब के पास फूड लाइसेंस और गुमास्ता लायसेंस नहीं मिला। इसके बाद भी वहां रेस्टोरेंट चल रहा था। बिना कोटपा एक्ट का लाइसेंस लिए सिगरेट रखी जा रही थी और स्मोकिंग जोन भी बनाया गया था।

आबकारी विभाग के अधिकारियों की मिली लापरवाही
लिस्टोमानिया बार संचालित करने के लिए आबकारी विभाग ने लाइसेंस दिया था। यहां कई बार मारपीट और देर रात तक बार संचालित होने की शिकायत की गई है, लेकिन इसके बाद भी आज तक आबकारी विभाग के अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

लोगों का यहां तक कहना है कि क्लब के संचालक की पकड़ इतनी ऊपर तक थी कि यहां पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारी कभी आते ही नहीं थे। इसका फायदा उठाकर क्लब को पूरी तरह से गैर कानूनी तरीके से चलाया जा रहा था।

बिना पुलिस वेरीफिकेशन गुंडो को दी थी नौकरी
लिस्टोमानिया बार एवं क्लब में बड़ी संख्या में बाउंसर रखे गए थे। यहां बाहर से लड़के लड़की देर रात तक पार्टी करते हैं। कई बार उनका यहां झगड़ा हुआ और बाउंसरों ने उन्हें बुरी तरह मारा। स्मृति नगर पुलिस चौकी में इसकी शिकायत भी दर्ज हुई, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने क्लब के संचालक से उनके यहां काम करने वाले स्टॉफ का पुलिस वेरिफिकेशन तक करना मुनासिब नहीं समझा।

निरीक्षण के दौरान क्लब में 47 स्टॉफ काम करते पाए गए, जिनमें से मात्र एक का पुलिस वेरिफिकेशन हुआ था। बाकी लोग कौन थे, कहां से आए उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण थे या नहीं पुलिस तक इससे अनजान थी। दुर्ग सिटी एएसपी संजय ध्रुव से कई बार यहां कार्रवाई के लिए कहा गया, लेकिन उनकी ओर से कलेक्टर के अंडर का मामला बताकर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

लोगों की भावनाओं से किया जा रहा था खिलावाड़
क्लाब के अंदर मांशाहारी और शाकाहारी का किचन अलग-अलग नहीं था। वहां मांस मटन और शाकाहारी सब्जी व पनीर आदि एक साथ एक जगह रखा हुआ था। किचन में शाकाहारी व मांसाहारी खाद्य सामग्री खुला करके एक ही कंटेनर में एक के ऊपर एक रखा गया था। एसडीएम का कहना है कि ऐसा करके क्लब संचालक ने शाकाहारी लोगों की भावना से खिलवाड़ करने का काम किया है।

गुमास्ता लाइसेंट के नियम की उड़ाई धज्जियां
निरीक्षण के दौारन बार संचालक ने क्लब में केवल 7 कर्मचारियों का काम करना दिखाया है, जबकि वहां 47 स्टाफ काम करते हुए पाए गए। उन 47 में से केवल एक स्टॉफ ही अनुज्ञप्ति प्राप्त मिला। शेष 46 में किसी का भी पुलिस वेरिफिकेशन नहीं होना पाया गया। क्लब में कार्यरत किसी भी स्टाफ का दस्तावेज नहीं होना पाया गया। काउण्टर पर रखे निक्कर का स्टॉक रजिस्टर में पर मौजूद नहीं पाया गया।

बिना लाइसेंस चलता था डीजे
क्लब के पास डीजे संचालित करने का लाइसेंस एम्यूजमेंट नहीं होना पाया गया। सबसे बड़ी हैरान करने वाली बात यह है कि इस लिस्टोमानिया बार एवं क्लब का अपना एक इंस्टाग्राम पेज भी है। इस पेज में हर दिन ये जानकारी दी जाती थी कि उनके यहां कब कौन सा डीजे आने वाला है। उसी को देखकर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से लड़के लड़की यहां नाइट पार्टी करने आते थे। इतना सब होने के बाद भी जिले के कलेक्टर सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी यह नहीं जान रहे थे कि यहां बिना लाइसेंस के डीजे बजाया जाता है।

एक और बार एंड क्लब में देर रात तक चलती है पार्टी
लिस्टोमानिया बार एवं क्लब एकलौता ऐसा क्लब और बार नहीं है, जो नियम के विपरीत शराब बेचने और नाइट पार्टी अरेंज करने का काम करता है। नेहरू नगर चौक में एनएच के किनारे एक बड़ा होटल है। इस होटल के टॉप फ्लोर में अस्थाई रेस्टोरेंट बनाया गया था। यहां देर रात तक शराब बेचने के साथ ही डीजे पार्टी अरेंज की जाती है। यहां भी आबकारी विभाग सहित पुलिस, जिला प्रशासन और निगम के अधिकारी आते हैं और बैठते हैं, लेकिन कोई भी यहां न तो कार्रवाई कर रहा है न ही जांच कर रहा है।

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