PDS चावल की कालाबाजारी में “अहमद” नामक कंट्रोल संचालक पर उठे सवाल।
खाद्य विभाग की चुप्पी से जनता में आक्रोश, जांच और FIR की मांग तेज।

दुर्ग 18 मई 2026 // छत्तीसगढ़ में गरीबों के हक का PDS चावल कथित तौर पर बाजारों में खपाए जाने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। क्षेत्र के लोगों ने आरोप लगाया है कि “अहमद” नामक एक कंट्रोल संचालक पर राशन चावल की कथित कालाबाजारी और अवैध परिवहन को लेकर लंबे समय से शिकायतें होती रही हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। लोगों ने जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से मांग की है कि संबंधित स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज़ और गोदामों की जांच कराई जाए।
जनता यह भी सवाल उठा रही है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद संबंधित खाद्य अधिकारी कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उनके खिलाफ भी विभागीय और आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
किन धाराओं में हो सकती है कार्रवाई?
यदि जांच में PDS चावल की कालाबाजारी, हेराफेरी या अवैध बिक्री साबित होती है, तो निम्न कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं:
Essential Commodities Act, 1955
धारा 3 और 7 — आवश्यक वस्तुओं की अवैध जमाखोरी, कालाबाजारी और नियम उल्लंघन पर कार्रवाई।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत संभावित धाराएं:
धोखाधड़ी
आपराधिक विश्वासघात
सरकारी योजना में भ्रष्टाचार या फर्जी रिकॉर्ड तैयार करना
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम
यदि किसी सरकारी अधिकारी की मिलीभगत या संरक्षण साबित होता है।
राशन दुकान का लाइसेंस निलंबन/निरस्तीकरण, स्टॉक जब्ती और आर्थिक दंड की कार्रवाई भी की जा सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ स्तर की टीम से कराई जाए ताकि गरीबों के हक पर डाका डालने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सके।


