
दुर्ग 8 जून 2826 // दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र स्थित सेवा सहकारी समिति मर्यादित रौंदा के धान उपार्जन केंद्र में ₹15 लाख 8 हजार 161 रुपये की गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आई है। आकस्मिक निरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज धान के स्टॉक और गोदाम में मौजूद वास्तविक भंडारण के बीच बड़ा अंतर पाए जाने पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित समिति प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

यह गड़बड़ी 29 मई को उस समय उजागर हुई जब खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की एक संयुक्त जांच टीम ने धान उपार्जन केंद्र का अचानक निरीक्षण किया। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड के अनुसार, समिति द्वारा कुल 73,952.80 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज की गई थी। इसमें से 65,657.62 क्विंटल धान मिलरों को जारी किया जा चुका था और 7,678.10 क्विंटल धान संग्रहण केंद्र भेजा गया था। इस हिसाब से उपार्जन केंद्र में 617.08 क्विंटल धान शेष होना चाहिए था। हालाँकि, टीम के भौतिक सत्यापन के दौरान गोदाम में मात्र 142 कट्टों में रखा 56.80 क्विंटल सरना धान ही मिला, जिससे रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच 560.28 क्विंटल धान की भारी कमी पाई गई।
इसके अतिरिक्त, जांच के दौरान रिकॉर्ड के अनुसार 2103 नए बारदाने भी उपलब्ध नहीं मिले। धान और इन बारदानों की कुल कमी का मूल्यांकन ₹15,08,161 किया गया है। जांच टीम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक धमधा शाखा के प्रबंधक भूपेंद्र सिंह मढ़रिया, सहायक खाद्य अधिकारी शशि सिंह, खाद्य निरीक्षक सुधा महिलांग और सहकारिता निरीक्षक प्रजय सोनी शामिल थे। टीम ने मौके पर पंचनामा तैयार कर अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी।
प्रारंभिक जांच में इसे सरकारी संपत्ति और सार्वजनिक धन से जुड़ी गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए समिति प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस जांच शुरू कर दी गई है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि धान और बारदानों की यह कमी लापरवाही का परिणाम है या फिर किसी सुनियोजित गबन का मामला। इस कार्रवाई के बाद जिले की अन्य धान उपार्जन समितियों में भी हलचल बढ़ गई है, और प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि धान खरीदी तथा भंडारण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में भी ऐसे आकस्मिक निरीक्षण जारी रहेंगे।




